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Shayaris by: Suprabha adarsh
माँ



सुकून की नींद ली होती हमने भी,
गर नसीब हमें माँ की गोद हुई होती |

Nov 21 2017 by Suprabha adarsh

दास्तान



लिखी गई है जब भी दास्तान - ए - मुहब्बत हमारी
तुम्हें अधूरा और मुझे पूरा क्यूँ लिखा गया ?

Nov 21 2017 by Suprabha adarsh

दास्तान



लिखी गई है जब भी ,
दास्तान - ए - मुहब्बत हमारी,
तुम्हें अधूरा और मुझे पूरा क्यूँ लिखा गया ?

Nov 04 2017 by Suprabha adarsh

माँ



सुकून की नींद ली होती हमने भी,
गर नसीब हमें माँ की गोद हुई होती |

Nov 04 2017 by Suprabha adarsh

इश्क़ की



इश्क़ की सजा कुछ इस कदर दी है मैंने उसे,

हुआ था जो दो दिलों का मेल-मिलाप इस तरह कि
दिल हमारा उसके पास उसका दिल हमारे पास |

निकाल लिया दिल अपना मैंने उसके सीने से, तब
जब वो जाने लगा ये कहकर...
कि अब नहीं रही मुहब्बत हमें तुमसे |

Oct 19 2017 by Suprabha adarsh

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